कागज़ पे लिखी कुछ लाइन ऐसी भी होती है,
किसी को हँसा और किसी को रुला जाती है,
निगाहें फेर वो जो मुझसे दूर बैठे हैं,उनको पता भी नही हम बेकसूर बैठे हैं.!!
निगाहें फेर वो जो मुझसे दूर बैठे हैं,
उनको पता भी नही हम बेकसूर बैठे हैं.!!
जब चली ठंडी हवा बच्चा ठिठुर कर रह गया
माँ ने अपने ला'ल की तख़्ती जला दी रात को
रात भी नींद भी
कहानी भी
हाए क्या चीज़ है
जवानी भी
हम उसे याद बहुत आएँगे
जब उसे भी कोई ठुकराएगा