हमदर्दी ना करो मुझसे ए मेरे हमदर्द दोस्तों,वो भी बड़ी हमदर्द थी जो दर्द हजारो दे गई !!
हमदर्दी ना करो मुझसे ए मेरे हमदर्द दोस्तों,
वो भी बड़ी हमदर्द थी जो दर्द हजारो दे गई !!
तस्वीरें लेना भी जरूरी हैं ज़िंदगी में...आईने गुजरा हुआ वक्त नही बताया करते!!
आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
तेरी नादानियों पर ख़ामोश था मैं,
और तूने मुझे कमज़ोर समझ लिया..
दिसम्बर की सर्दी है उस के ही जैसी
ज़रा सा जो छू ले बदन काँपता है
न जाने किस तरह का इश्क कर रहे हैं हम,
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम।