शहर भर मेँ एक ही पहचान है ‘हमारी’
सुर्ख आँखे,गुस्सैल चेहरा और नवाबी अदायेँ’
और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया
सामने बैठे रहो दिल को करार आएगा,
जितना देखेंगे तुम्हें उतना ही प्यार आएगा।
काश एक ख्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर,
वो आके गले लगा ले मेरी इजाजत के बगैर।
पता है तुम्हारी और हमारी
मुस्कान में फ़र्क क्या है?
तुम खुश हो कर मुस्कुराते हो,
हम तुम्हे खुश देख के मुस्कुराते हैं…