गरीब नहीं जानता क्या है मज़हब उसका
जो बुझाए पेट की आग वही है रब उसका
तेरे आने से ये शाम
और खूबसूरत बन जाती हैं
फिजा भी रंग बदलती है
जब तू आंखों में काजल लगाती हैं
अंधेरों का डर यहाँ किस को है….
डर तो उसका है जो उजालो में ना हो सका!
दिल में क्या फूल खिला करते थे,
अपना घर सजाने की खातिर,
हम उसका नाम लिखा करते थे,
कल उसे देखा तो याद आया
हम भी कभी मोहब्बत किया करते थे!!
कभी शब्दो में न
तलाश करना वजूद
मेरा...
मैं उतना कह नहीं
पाती,जितना
महसूस करती हूँ..