हद ना पूछो मेरीबेबसी की तुम..मै दर्द बयां करता हूंऔर तू हंसकर सुनती है..!
हद ना पूछो मेरी
बेबसी की तुम..
मै दर्द बयां करता हूं
और तू हंसकर सुनती है..!
डर तो इंसान का वहम है,
जो उसे यूँ ही लग जाता।
तब तक है लगता रहता,
जब तक इंसान सहमता रहता.
मैंने लिख दिए है, गीत तुम्हारे लिए,जब भी जी चाहे गुनगुना लेना,हम सदा थोड़ी रहंगे,नाराजगीं के लिए तेरे पास,आज हूँ, थोड़ा मुस्कुरा लेना l
हमें क्या पता था?
कि इश्क कैसा होता है?
हमें तो बस आप मिले और,
इश्क हो गया.
मेरे-तेरे इश्क़ की छाँव में… जल-जलकर!
काला ना पड़ जाऊ कहीं !
तू मुझे हुस्न की धुप का
एक टुकड़ा दे…!