हमें क्या पता था?
कि इश्क कैसा होता है?
हमें तो बस आप मिले और,
इश्क हो गया.
न सोचा मैंने आगे,
क्या होगा मेरा हशर,
तुझसे बिछड़ने का था,
मातम जैसा मंज़र!
कुछ लुटकर, कुछ लूटाकर लौट आया हूँ,
वफ़ा की उम्मीद में धोखा खाकर लौट आया हूँ |
अब तुम याद भी आओगी, फिर भी न पाओगी,
हसते लबों से ऐसे सारे ग़म छुपाकर लौट आया हूँ |
Khushbu ki tarah aapke paas bikhar jaunga,Sukun bankar dil mein utar jaunga.Mehsus karneki koshish kijiye,Door hokar bhi paas nazar aounga…
Main uske haathon ka khilona hi sahi;
kuch der ke liye hi sahi, usne mujhe chaha to hai..