प्रेम से सनी मिट्टी में ही...,,
विरह के पुष्प उगते हैं ...
"मन अकेला और यादों वाला ज़माना होता है,ये नज़्म ही, तुमसे बातों का बहाना होता है l"
"जब शाम मिलता है, रात से,
उस वक़्त कभी, मुझसे मिलो ना,
सामने अंधेरा हो,पीछे उजाला हो,
चिराग इश्क़ का,उस पहर जलाओ ना l"
कुछ लुटकर, कुछ लूटाकर लौट आया हूँ,
वफ़ा की उम्मीद में धोखा खाकर लौट आया हूँ |
अब तुम याद भी आओगी, फिर भी न पाओगी,
हसते लबों से ऐसे सारे ग़म छुपाकर लौट आया हूँ |
“इन हसीनो से तो कफ़न अच्छा है,
जो मरते दम तक साथ जाता है,
ये तो जिंदा लोगो से मुह मोड़ लेती हैं,
कफ़न तो मुर्दों से भी लिपट जाता है.”
रिश्तों की ख़ूबसूरती एक दूसरे की बातें बर्दाश्त करने में है,
ख़ुद जैसा इन्सान तलाश करोगे तो अकेले रह जाओगे।