मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत कामैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का
मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
कल जो मिली थी खुशबु-ऐ-इत्र,उसकी बात तो बता रहा हूँ lऔर जो महका गया,वो कोना-कोना रूह तक lवो एहसास जिए जा रहा हूँ l
"उसे पाने की कोशिश में, खुद को खो चुका हूँ,कई बार टूटे है सपने, मैं कई बार रो चुका हूँ l"
हमारी हर रात तम्हारे साथ हो,
ओर प्यार मोहब्बत की बात हो,
हम लेले तुम को बाँहों में अपनी,
फिर बताये तुम ही ज़िन्दगी तुम ही हमारी कैनाथ हो,
गुड नाईट डिअर…
वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ