जहाँ कमरे में कैद हो जाती है ज़िन्दगी,लोग उसको बड़ा शहर कहते हैं ।
रात का अंतिम ख्याल,सुबह की प्रार्थना सा,साथ रहती हो तुम l'हाँ' सपनों में नहीं आती,मुझे कभी-कभी सोने,भी नहीं देती हो तुम l
"मेरे कंधे पे सर रख तू खुद में खो सके,
तेरे कंधे पे सर रख मैं कभी रो सकूँ l"
तो तलाश आज दोनों की ख़त्म हुई.....❤💕
अब इतनी भी बेरूख़ी नहीं रखते,
अपनों को दुःखी नहीं रखते.
ज़िंदगी की उम्र बहुत छोटी है,
लोगों से दुश्मनी नहीं रखते.
नर्म लफ़्ज़ों से भी लग जाती है चोटें अक्सर,
रिश्ते निभाना बड़ा नाज़ुक सा हुनर होता है…….
मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
पर सुना है सादगी मे लोग जीने नहीं देते।