आईना देख कर तसल्ली हुईहम को इस घर में जानता है कोई
आईना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
कही से ये फिजा आई
ग़मों की धुप संग लायी
खफा हो गये हम, जुदा हो गये हम....
भरोसा क्या करना गैरों पर,जब गिरना और चलना है अपने ही पैरों पर।
हर सुबह आपको असल दें, हर फूल आपको मुस्कान दें,
हाँ दुआ करते हैं कि खुदा आपको नए सवेरे के साथ,
कामयाबी का नया आस्मां दे….
मन करता है जो दर्द है दिल में
बयां कर दूँ हर दर्द तुझसे ,
अब ये दर्द छुपाए नहीं जाते
लेकिन नहीं कह सकता कुछ तुझसे
क्योंकि दिलो के दर्द दिखाए नहीं जाते ……