हर किसी को मंजिल मिलती नहीं प्यार में।कांटे मिलते है अक्सर फूलों के हार में।।
आओ आगोश में कि ,इश्क का अंजाम हो जाएँ,थोड़ा बुझें थोड़ा जलें ,आज की शाम हो जाए।
आओ आगोश में कि ,इश्क का अंजाम हो जाएँ,
थोड़ा बुझें थोड़ा जलें ,आज की शाम हो जाए।
अब ज़िंदगी तेरे दिल में गुजारनी है,तो मुझे ये गुनाह भी कबूल है,सज़ा साल, दो साल का मत रखनाताउम्र ही मेरी मोह्हबत का मूल है l
सर्दी और गर्मी के उज़्र नहीं चलते
मौसम देख के साहब इश्क़ नहीं होता
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़
जान का रोग है बला है इश्क़
प्यार दिल में होना चाहिए लफ्जों में नहीं
और
नाराजगी लफ्जों में होनी चाहिए दिल में नहीं