बहते अश्कों की जुबाँ नहीं होती,
कभी लफ्जों में मोहब्बत बयाँ नहीं होती,
मिले जो प्यार तो कदर करना,
क्योंकि किस्मत हर किसी पर मेहरबान नहीं होती.
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
यूँ बिछड़ना भी बहुत आसाँ न था उस से मगर
जाते जाते उस का वो मुड़ कर दोबारा देखना
समझदार बनने की कोशिश में शरारत
भी खो बैठे
अब इस समझदारी में सबको साजिश नजर
आती है…
सर्दी के मौसम का मजा अलग सा है,
रात मे रजाई का मजा अलग सा है.
धुंध ने आकर छिपा लिया सितारों को,
आपकी जुदाई का ऐहसास अब अलग सा है
Itna toota hoon ki
Chhoone se bikhar jaooanga
Ab agar aur dua
Dogi to mar jauanga..