यह चमत्कार केवल “विश्वास” ही कर सकता हैं,
जो पत्थर को भी “भगवान” कर सकता हैं.
“निकल आते हैं आँसू गर जरा सी चूक हो जाये,
किसी की आँख में काजल लगाना खेल थोड़े ही है।”
शाम की लाली रात का काजल सुबह की तक़दीर हो तुम,
हो चलता फिरता ताजमहल सांसे लेता कश्मीर हो तुम!!
खूबसूरत ज़िस्म हो या सौ टका ईमान…
बेचने की ठान लो तो हर तरफ बाज़ार है!
रूह ने कई बार मुझ से अकेले में कहाजी लिए हो तो चलो जिस्म बदल कर आयें
हर रोज, चुपके से, निकल आते हैं नये पत्ते ।यादों के दरख़्तों में, मैंने, कभी पतझड़ नहीं देखा ।।