सूखे पत्ते की तरह थे हम किसी ने समेटा भी तो
यूं वक़्त को बर्बाद न किया कर,
गर वक़्त चाहे तो तुझे बर्बाद कर देगा !!
मीलों का सफर एक पल में बर्बाद हो गया…
जब अपनों ने कहा कहो कैसे आना हुआ…!!
हर रोज, चुपके से, निकल आते हैं नये पत्ते ।यादों के दरख़्तों में, मैंने, कभी पतझड़ नहीं देखा ।।
"वो कागज़ और मैं, कलम सा लगता हूँ,उसे मिलने के बहाने, रोज लिखता हूँ,स्याह मोह्हबत का,कागज़ चुम लेता है,कोई गज़ल फिर, उसके नाम कर देता हूँ l"
दिल मुझे उस गली में ले जा कर
और भी ख़ाक में मिला लाया