प्रेम से सनी मिट्टी में ही...,,
विरह के पुष्प उगते हैं ...
कुछ चीजें कभी नही बदलती
जैसे माँ का प्यार, पिता की तुम्हारे
लिए चिंता और पुराने सच्चे दोस्तों का साथ |
" 'तुम ठीक हो' मेरे पूछने पे,जवाब 'हाँ' में आना ही..आज किसी मोह्हबत वाली,बात से जादा सुकून देता है l"
"जब भी उठाता हूँ कलम,सोचता हूँ तुम्हारा नाम लिख दूँ,पता नहीं क्या बात कहूँ,कुछ नहीं तो, अपना हाल लिख दूँ l"
"अपने गलतियों पे झुक के माफ़ी माँग लेना,
अपने अहम से जादा रिश्तों को मोल देना,
वैसे तो हमें बार -बार लौट आने की आदत है,
पर मेरी मोह्हबत को कमजोरी ना जान लेना l"
ये कैसा सरूर है तेरे इश्क का मेरे मेहरबाँ,
सँवर कर भी रहते हैं बिखरे बिखरे से हम!