नाम क्या दूँ मैं अपनी दीवानगी को..
बेचैनी दिल की तड़पने लगी है..
इस रवानगी से में क्या कहूँ..
जो हर पल तुम्हे याद करने लगी है.
Happy Hug Day.
और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
रात के शायद एक बजे हैं
सोता होगा मेरा चाँद
हम अपने इख़्तियार की हद से गुजर गए,चाहा तुम्हें तो प्यार की हद से गुजर गए,
जागी है अपने दिल में गुलाबों की आरज़ू,जब मौसम-ए-बहार की हद से गुजर गए।