रोज़ यही शिकवा आगोश में खिलते क्यूँ नहीं,
मुलाक़ात करते हो आए दिन मिलते क्यूँ नहीं.
श्याम तेरी बंसी पागल कर जाती है,
बोल तेरी मीठी घायल कर जाती है l
वो गोरे होते तो क्या होते,
सांवले रंग पे ही दुनिया मर जाती है l
जल्दी ही लौटेंगे खुशिया अभी कुछ गमो का शोर ह
जरा सम्भल कर रहिये इम्तिहानो का दौर ह
चिराग कोई जलाओ की हो वजूद का एहसास,
इन अँधेरों में मेरा साया भी छोड़ गया मुझको !!!