शायर तो हम
“दिल” से है….
कमबख्त “दिमाग” ने
व्यापारी बना दिया.
मैं चंद्रमुखीतू सूरजमुखीमैं तुझसे दुखीतू मुझसे दुखीएक काम कर दे बिल्डिंग से कूदकर मरजा तू भी सुखी मैं भी सुखी |
अपनी रातें उनके लिए ख़राब करना छोड़ दो दोस्तों,जिनको ये भी परवाह नहीं की तुम सुबह उठोगे भी या नहीं।
तैरना तो आता था हमें मुहब्बत के समंदर में
लेकिन जब उसने हाथ ही ना पकड़ा तो डूब जाना ही अच्छा था