रोज़ यही शिकवा आगोश में खिलते क्यूँ नहीं,
मुलाक़ात करते हो आए दिन मिलते क्यूँ नहीं.
Kiss किसी ki महेफि़ल me,Kiss किसी ने kiss kiss ko kiss किया.एक hum थे jisne हर Miss ko kiss किया,और ek आप थे jisne पर kiss ko miss किया….
बोलो है कोई वकील ऐसा इस जहान में
जो हारा हुआ इश्क जीता सके मुझको
बरस रहे बादल आँखे रो रहीतन्हाई हर बात कह रहीजाये तो कहा जायेहर ओर गम की हवा चल रहीबड़ा अजीब मंजर है इश्क कामर चुका मानस मगर साँस चल रही
Bhar loon tujh bahon mein
Tujh per chada rang khud pe chada loon,
Ho ke teri aaj mein Sanam
Rango ki tarha apni duniya ko rangeen bana loon.