मैंने कई बार की प्रार्थनापर ईश्वर सेमाँगा नहीं कभी कुछमुझे लगता हैवो जानता है...हमारे लिए क्या सही हैऔर क्या ग़लत..
"दोस्ती से प्यार तक एक 'रेखा' खींच दी,बातों ने उनकी ना जाने कब मोह्हबत रच दी,ख्वाहिशें ना जाने कितना 'अंकुर' हो गये,आग दिल में लगा, उसने मेरी दुनियाँ तज दी l"
"वो बार-बार DP बदल कर लगाते है,उन्हें पता ही नहीं,वो कितने खूबसूरत नज़र आते है,हर बार महज बदलते है कपड़े,दिल तो वही, सुन्दर सा लाते है l
सर्दी और गर्मी के उज़्र नहीं चलते
मौसम देख के साहब इश्क़ नहीं होता
रात भी नींद भी
कहानी भी
हाए क्या चीज़ है
जवानी भी
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़
जान का रोग है बला है इश्क़