"वो बार-बार DP बदल कर लगाते है,उन्हें पता ही नहीं,वो कितने खूबसूरत नज़र आते है,हर बार महज बदलते है कपड़े,दिल तो वही, सुन्दर सा लाते है l
लोग पूछते हैं की तुम क्यूँ अपनी मोहब्बत का इज़हार नहीं करते,
हमने कहा जो लब्जों में बयां हो जाये
सिर्फ उतना हम किसी से प्यार नहीं करते…!!!
भरोसा क्या करना गैरों पर,जब गिरना और चलना है अपने ही पैरों पर।
तकदीर के हाथों खुद को में जोड़ना नहीं चाहता,
मेरे दो हाथो का होसला में तोडना नहीं चाहता,
मौसम की तरह बदल जाती ये हाथो की लकीरें,
बंद मुट्ठी मेरी हरगिज़ मैं खोलना नहीं चाहता।
Na Samet Sakoge Qayamat Tak Jise Tum,
Kasam Tumhari Tumhein Itni Mohabbat Karte Hain.