वक़्त पर न जा क्योंकि वक़्त तो हर जख्म की दवा है…
आज तुमने हमें भुला दिया कल तम्हें कोई और भुला देगा…
ये जो मीठा सा दर्द,जब तेरी बातों से होता है lमोह्हबत है मेरे अंदर,इसका एहसास होता है l
अब तो इश्क़ भी हम दोनों पर तरस नहीं खाता...अब वो मेरे शहर नहीं आती और मैं उसके शहर नहीं जाता..
गुस्सा ना जाने,सारा कहाँ खो गया lउसकी आवाज़ सुनी,मन फिर उसका हो गया l
"जो ख़त मैंने लिख के जला दिये,जो अल्फाज़ मैंने लिख के मिटा दिये,जो बात मैंने खुद से भी छिपा लिए,उनमें मेरी मोह्हबत के अहसास थे l"
हाल तुझे मैं अपना बताऊँ कैसे,
चीर के दिल तुझे अपना दिखाऊँ कैसे,
है रोना वही हमेशा का अभी भी,
दास्ताँ मैं अपनी फिर दोहराऊँ कैसे,
ग़म की अपनी बातें तुझे सुनाऊँ कैसे,
मेरी ख़ामोशी में ही तेरी मोहब्बत है,
अपने इन लब्ज़ों को मैं हिलाऊं कैसे ||