तुझे भूल जाऊँ मेरे दिल से सिफारिश न कर,बेशक तू बेदख़ल कर दे पर लावारिस ना कर!
तुझे भूल जाऊँ मेरे दिल से सिफारिश न कर,
बेशक तू बेदख़ल कर दे पर लावारिस ना कर!
हमारे हर सवाल का सिर्फ एक ही जवाब आया,
पैगाम जो पहूँचा हम तक बेवफा इल्जाम आया।
मेरे दोस्तों ने इकट्ठा किया मेरे ही कत्ल का सामान,
मैंने उनसे कहा,
यारो तुम्हारी नफरत ही काफी थी मुझे मारने के लिए……
तुझको खुदा ने रुक-रुक बनाया,
पूरी ज़माने की खुदाई तुझ में ही भर दी,
हर अंग तेरा जैसे ,
रह-रह तू बरसे सावन महीना…
उनसे बात करके जिस कदर दिल को चैन आता है,
इतना असर तो की दवा भी नही दिखा पाता है