Story in Hindi & English

The True Story of The Holocaust
यहूदियों के नरसंहार की असली कहानी

इतिहास में कई सारे नरसंहार की कहानी मिलती हैं जो बहुत ही भयानक और दर्दनाक हैं. जिसमें कई सारे निर्दोषों को बदला लेने के लिए मौत के घाट उतार दिया गया. इन नरसंहारों में कई लाख लोगों की निर्मम हत्याएं कर दी गई. जैसे जलियाँवाला बाग़ हत्या कांड, भारत विभाजन का हत्या कांड, और होलोकॉस्ट जिसे यहूदियों का नरसंहार भी कहा जाता हैं ये सब शामिल हैं. जिसमें से सबसे होलोकॉस्ट एक ऐसा केस हैं जिसे पूरी प्लांनिग के साथ किया गया था. 

Why The First World War Happened?
आख़िर क्यों हुआ था पहला विश्व युद्ध?

मनाव इतिहास की सबसे बड़ी जंग जो की साल 1914 में लड़ा गया, सबसे भयानक और विनाशकारी था. जिसे इतिहास में फर्स्ट वर्ल्ड वॉर, और द ग्रेट वॉर के नाम से भी जाना जाता हैं. जिसमें विश्व के तक़रीन सभी देशों ने हिस्सा लिया था. इस पूरे युद्ध में तक़रीबन 7 करोड़ लोगों ने भाग लिया था जिसमें से केवल 6 करोड़ तो सिर्फ यूरोपियन थे. इस विनाशकारी युद्ध में कुल 90 लाख फ़ौजी और 130 लाख आम लोग मारे गए थे. 


What was in The Treaty of Versailles which lead Second World War
वर्साय की संधि में ऐसा क्या था की दूसरा विश्व युद्ध हो गया?

विश्व के इतिहास में बहुत से ऐसी संधिया हुई है या तो कराई गई है जिनका ज़िक्र सबसे पहले होता हैं. उनमें से एक हैं वर्साय की संधि. जिसे प्रथम युद्ध के समापन के बाद मित्र राष्ट्रों ने मन मानी तरीके से जर्मनी पर थोपी थी. ये संधि में कई भी शांति की व्यवस्था नहीं थी बल्कि इसमें असंतोष और निराशा थी. जिसकी वजह से 20 साल 2 महीने 4 दिन के बाद ही पूरा विश्व एक और विनाशकारी युद्ध के चपेट में आ गया जिसे मानव इतिहास में दूसरे विश्व युद्ध के नाम से जाना जाता हैं. 


Story of The Second World War
द्वितीय विश्व युद्ध की कहानी

मानव इतिहास एक बार नहीं बल्कि दो दो बार महाविनाशकारी युद्ध का साक्षी बना हैं. उसने अपने आखों के सामने कई करोड़ों लोगों को मरते देखा हैं. उसने परमाणु हथियारों का प्रत्यक्ष इस्तेमाल देखा हैं. किस तरह जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु हमलें की वजह से ऐसा लगा की ब्राह्मण में सूर्य का विस्फ़ोट हो गया हैं. दूसरा विश्व युद्ध प्रथम विश्व युद्ध से ज्यादा विनाशकारी था. 

Why did Adolf Hitler commits suicide?
तानाशाह हिटलर ने खुद को गोली क्यों मारी?

मानव इतिहास का सबसे बड़ा तानाशाह कहे जाने वाले अडोल्फ़ हिटलर ने आख़िर दिनों में ख़ुदकुशी कर ली थी. उसने अपने ही रिवाल्वर से खुद को गोली मार ली थी लेकिन ऐसा क्यों? ऐसा क्या हुआ था की हिटलर जो की द्वितीय विश्व युद्ध का जनक और जर्मनी का सबसे ख़तरनाक शासक होने के बावजूद भी इस तरह से खुद को गोली मार ली? हिटलर के बारे में इतिहास में जब भी पढ़ा या सुना जाता हैं तो सब यही कहते हैं कि उससे बड़ा और ख़तरनाक नरसंहारक कोई भी नहीं था. 

Mughal Emperor Jahangir : a fascinating man and emperor!
मुग़ल सम्राट जहाँगीर की क्रूरता के क़िस्से

मुग़ल साम्राज्य का सबसे ज्यादा मूडी और क्रूर शासक जहांगीर था और वो इस बात का उल्लेख अपनी किताब तुज़क-ए- जहाँगीरी में किया हैं. जहाँगीर ने जब अकबर के सबसे ख़ास और विश्वास पात्र मंत्री अबुल फज़ल की हत्या कर दिया था तब भी उसे किसी बात का पछतावा नहीं था. 


Bhagwan Shiv ki puja mein ketki ke phul kyon nhi chadhate? Shivpuran
भगवान शिव की पूजा में केतकी (केवड़े) के फूल का उपयोग क्यों नहीं करते हैं?

हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं के पूजा-पाठ में बहुत सारे सामग्री की जरूरत और विधि विधान का पालन किया जाता हैं. साथ ही साथ कई सारे सुगन्धित पुष्पों का भी प्रयोग किया जाता हैं. लेकिन क्या आपको पता हैं कि भगवान शिव की पूजा में केतकी यानी केवड़े के फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए ये पूर्णतः वर्जित हैं. इसके पीछे एक बहुत ही अनोखी पौराणिक कहानी जुड़ी हुई हैं. जिसके अनुसार भगवान शिव ने स्वयं केतकी के पुष्प का परित्याग किया था. 


Shivpuran Story: Shank se nhi chadhate Shivling par jal
शंख से भगवान शिव पर जल चढ़ाना क्यों मना हैं?

हमारे पुराणों में कई सारी कहानी मिलती हैं. इतने सारे पुराण हैं और सबका अपना अपना महत्व है. इसी में से एक हैं शिव महापुराण जिसमें भगवान शिव के बारे में कई सारे रहस्यों और कहानियों का उल्लेख मिलता हैं. इसी में से एक कहानी ये भी हैं कि आख़िर भगवान शंकर को शंख से जल क्यों नहीं चढ़ाया जाता हैं? इसके पीछे क्या रहस्य हैं? 

Mahabharat Story: Vidur koun the?
महात्मा विदुर की आत्मा युधिष्ठिर के अंदर समा क्यों गई?

जब वनवास पर गए हुए विदुर से मिलने युधिष्ठिर जाते हैं और आश्रम में इंतज़ार करते हैं. कुछ देर के बाद युधिष्ठिर को विदुर उसी ओर आते हुए दिखाई दिए, लेकिन आश्रम में इतने सारे लोगों को देखकर विदुरजी पुन: लौट गए.


Story of Three Thieves
तीन चोरो की कहानी

एक बार की बात हैं तीन चोर थे, वो हमेशा आपस में चोरी करते थे और सारा माल बराबर-बराबर बाँट लेते थे. इस तरह से उन्होंने धीरे-धीरे कई सारी जगह चोरियां की और खूब सारा धन इकठ्ठा कर लिया. 

एक दिन उन तीनों फैसला किया क्यों ना आख़िरी बार चोरी करते है और इसके बाद हम सब चोरी छोड़कर जीवन भर आराम से ऐश करेंगे. 

Andher nagari chaupat Raja, take ser aloo, take ser khaja
अंधेर नगरी चौपट राजा, टेक सेर आलू, टेक सेर खाजा

एक बार एक साधु अपने दो शिष्यों, नारायणदास और गोवर्धनदास के साथ एक नगर के पास जा पहुंचे. उन्होंने उन दोनों से कहा, "बच्चा नारायणदास तुम दक्षिण दिशा से इस नगर में जाओ और गोवर्धनदास तुम उत्तर की दिशा से और नगर में जो भी भिक्षा मिले उसे लेकर आओ."

Akbar Birbal Stories
अनोखा ख़त

एक बार बादशाह अकबर अपने मंत्रियों से पूछने लगे की सबसे अच्छी सल्तनत कौन सी हैं और सबसे अच्छा राजा कौन हैं? सभी ने सिर्फ एक ही नाम लिया और कहा, महाराज आप से अच्छा कोई राजा नहीं हो सकता और आपकी सल्तनत भी सबसे अच्छी सल्तनत हैं. यहाँ पर हर कोई ख़ुश हैं, आप बहुत बहदुर हैं. आपकी ही सल्तनत सबसे अच्छी सल्तनत हैं.

Bail ka Doodh Akbar-Birbal Story
बैल का दूध अकबर-बीरबल

बादशाह अकबर के दरबार में बीरबल सबसे ज्यादा बुद्धिमान और चालक आदमी थे. अक्सर अबकर उनकी तारीफ किया करते थे और इसी कारण बाकि के लोग उनसे जलते थे. एक दिन अकबर ने भरे दरबार में बीरबल की तारीफ कर दी जिससे दरबार में बैठे एक मंत्री ने उन्हें चुनौती दे दी. उसने कहा, महाराज अगर इतने ही बुद्धिमान हैं तो वो बैल का दूध लेकर दिखा दे?

Akbar-Birbal Story
बंद मूर्ति वाला मंदिर

एक बार अकबर के दरबार में सभी लोग बैठकर बादशाह से साधु, संतों, मौलवियों और पीर बाबाओं की महिमा का गुणगान कर रहे थे. इसी बीच अकबर भी उनकी बातों से खूब प्रभावित हुए और उन्होंने भी उनकी हाँ में हाँ मिलाया और कहा, यकीनन हमें अधिक से अधिक साधु , महात्माओं के सेवा करनी चाहिए क्योंकि उन्हीं की वजह से लोगों की मुरादें पूरी होती हैं, कई सारे चमत्कार होते हैं. 


Singhasan Battisi Storeis Part 1
पहली पुतली रत्नमंजरी~राजा विक्रम के जन्म तथा सिंहासन प्राप्ति की कथा

बहुत समय पहले राजा भोज उज्जैन नगर पर राज्य करते थे। राजा भोज आदर्शवादी, सामाजिक एवं धार्मिक प्रवृति के न्यायप्रिय राजा थे। समस्त प्रजा उनके राज्य में सुखी एवं सम्पन्न थी। सम्पूर्ण भारतवर्ष में उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई थी। उन्हीं के समय से चली आ रही कहावत, 'कहां राजा भोज और कहां गंगू तेली' आज भी जनसाधारण को प्रभावित करती है।