हमने सुना है रहती है अब बेकरार वो,
छुपके किसी का करती है इंतजार वो!
टिक टिक करते घड़ियों के कांटे,
उम्र ढल रही मेरी बताते रहते है…
आँखें थक गई है आसमान को देखते देखतेपर वो तारा नहीं टूटता ,जिसे देखकर तुम्हें मांग लूँ
" हम ता-उम्र एक दूसरे जैसे नहीं है,ये कह के आपस में लड़ते रहे..कितना अच्छा होता,तुम मेरी कमी,मैं तुम्हारी कमी पूरा कर देता l "
सभी के दीप सुन्दर है,हमारे क्या,तुम्हारे क्या lरौशनी है ये बड़ी बात है,इस किनारें क्या, उस किनारें क्या l
लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ सेतेरी आंखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से