टिक टिक करते घड़ियों के कांटे,
उम्र ढल रही मेरी बताते रहते है…
खुदा मुझ पर एक नजर कर दे
उस अजनबी को मेरा हमसफर कर दे
जब भी वो सांस ले उसे मेरा नाम सुनाई दे
मेरी चाहत का उस पर इस कदर असर कर दे
लाखों तूफान उठे है इस दिल में
तुजे देखने के बाद
काश
जुल्फों की काली घटाओं से ढक पाऊ
ये चाँद सा चेहरा तेरा
शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है
मिलने का वादा कर गयी थी,
वापस लौट आउंगी ये कहकर गयी थी,
आई है अब वो जनाज़े पे मेरे,
वादा वो अपना निभाने चली थी!!