" हम ता-उम्र एक दूसरे जैसे नहीं है,ये कह के आपस में लड़ते रहे..कितना अच्छा होता,तुम मेरी कमी,मैं तुम्हारी कमी पूरा कर देता l "
रात है काफ़ी, ठंडी हवा चल रही है,
याद में आपकी किसी की मुस्कान खिल रही है,
उनके सपनो की दुनिया में आप खो जाओ,
आँख करो बंद ओर आराम से सो जाओ
मौसम था बेकरार तुम्हें सोचते रहे,कल रात बार बार तुम्हें सोचते रहेबारिश हुई तो लग कर घर के दरवाजे से हमचुप चाप बेकरार तुम्हें सोचते रहे...
काश तकदीर भी होती किसी जुल्फ की तरह…
जब जब बिखरती संवार लेते…
“हमारे आंसूं पोंछ कर वो मुस्कुराते हैं,
उनकी इस अदा से वो दिल को चुराते हैं,
हाथ उनका छू जाये हमारे चेहरे को,
इसी उम्मीद में हम खुद को रुलाते हैं।”