जितना किसी से डरोगे,
उतना बेवजह तडपोगे .
क्यूंकि इन्सान जिससे जाता सहम,
वह डर तो है मन का वहम .
करने वाले डरा नहीं करते,
डरने वाले करा नहीं करते .
जो करते है डर पे काबू,
उनका दिमाग कभी ना हो बेकाबू .
बड़ी दूर तक जाने का इरादा है,यही एक छोटा सा वादा है lमेरे गमो को चुम लेती है वो ,उसकी खुशी हो जाने का इरादा है l
उसकी पलकों से आँसू को चुरा रहे थे हम…
उसके गमों को हंसी से सजा रहे थे हम…
फिर जलाया उसी दीये ने मेरा हाथ…
जिसकी लौ को हवा से बचाये जा रहे थे हम…
तुम्हारे बाद मोहब्बत की ही नहीं हमनेजिसे भी चाहा .. उसे धोखा दिया।
“सब को शौक़ है दरारों में झांकने का,दरवाज़ा खोल दो तो कोई हाल तक नहीं पूछता”