सुरमई शाम का काजल लगा के रात आई है,
पलकें यूँ झुकीं हैं मानों चाँद पर बदरी छाई है!
यूं वक़्त को बर्बाद न किया कर,
गर वक़्त चाहे तो तुझे बर्बाद कर देगा !!
मीलों का सफर एक पल में बर्बाद हो गया…
जब अपनों ने कहा कहो कैसे आना हुआ…!!
तेरी खामोशी, अगर तेरी मजबूरी है,तो रहने दे इश्क कौन सा जरूरी है.
हर रोज, चुपके से, निकल आते हैं नये पत्ते ।यादों के दरख़्तों में, मैंने, कभी पतझड़ नहीं देखा ।।