सब फूल लेकर गए मैं कांटे ही उठा लाया;
पड़े रहते तो किसी अपने के पाँव मे जख्म दे|
क्या करोगे तुम मुझसे ऐसी मुलाकातजहा बिछड़ने का रिवाज न हो.
क्या करोगे तुम मुझसे ऐसी मुलाकात
जहा बिछड़ने का रिवाज न हो.
उन्हें इश्क़ हुआ था
मझे आज भी है....!
वो किसी अखबार में किस्सा हो जाये,कभी मेरे मोह्हबत का भी हिस्सा हो जाये l
नया सवेरा है नयी सुबह है…
नए दिन की उमंग बहुत है
खोल दो आँखें अब तुम भी जल्दी से …
बिन तेरे हर लम्हा मुश्किल है
ये वक़्त बेवक़्त मेरे ख्यालों
में आने की आदत छोड़ दो तुम,
कसूर तुम्हारा होता है और
लोग मुझे आवारा समझते हैं