काश कहीं से मिल जाते वो अल्फाज हमें भी जो तुझे…
बता सकते कि हम शायर कम तेरे दीवाने ज्यादा हैं…
कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी,कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा।
तुम्हें कैसे लगा मैं फ़ोन नम्बर भूल जाऊँगामुझे तो रोल नम्बर भी तुम्हारा याद है अब तक।
सूरज निकलने का वक्त हो गया है,फूल खिलने का वक्त हो गया है,लेकिन नींद से जागो मेरे दोस्त,क्योंकि सपनों को हकीकत में बदलने का वक्त हो गया है!Good Morning
"मोह्हबत में गुलाब के पौधे नहीं,
बरगद का पेड़ लगाया है..
आज तो खूबसूरत कुछ भी नहीं,
कल के उम्मीदों का आसमां सजाया है l"❤
कृषि कानूनों को इतना बेहतर बनाएं,
कि सड़कों पर कभी गरीब किसान न आएं.