किसी ने सालों साल लगा दिए “सफल” होने के लिए…
और लोगों को “सिर्फ दो मिनट” लगे ये कहने में…
कि उसकी “किस्मत” कितनी अच्छी है…
Good Night
मेरे निहारने को, वो घूरना समझती रही,पूरे प्यार की अधुरी बात यूँ कहती रही lहर कोने में इश्क की खुशबु फैलाने की बात थी,इसलिए मेरे हर गलती को नज़रअन्दाज करती रही l
ये जो मीठा सा दर्द,जब तेरी बातों से होता है lमोह्हबत है मेरे अंदर,इसका एहसास होता है l
अब तो इश्क़ भी हम दोनों पर तरस नहीं खाता...अब वो मेरे शहर नहीं आती और मैं उसके शहर नहीं जाता..
माँ की सी मुझे नज़र दे ऐ खुदाकि ज़माना मुझे फिर बुरा न लगे।
"जो ख़त मैंने लिख के जला दिये,जो अल्फाज़ मैंने लिख के मिटा दिये,जो बात मैंने खुद से भी छिपा लिए,उनमें मेरी मोह्हबत के अहसास थे l"