रोज़ यही शिकवा आगोश में खिलते क्यूँ नहीं,
मुलाक़ात करते हो आए दिन मिलते क्यूँ नहीं.
तेरे रुखसार पर ढले हैं मेरी शाम के किस्से,खामोशी से माँगी हुई मोहब्बत की दुआ हो तुम।
"आओ की, अब ये दिल चैन तो पा जाये,भटका राही कोई, मंजिल को पा जाये,ठहरा रास्ते में, ये दिल कई जगह,तेरी आँखों के यादों से, कभी ये निकल नहीं पायें l"
जो गुज़ारी न जा सकी हमसेहमने वो ज़िंदगी गुज़ारी है।
जल्दी ही लौटेंगे खुशिया अभी कुछ गमो का शोर ह
जरा सम्भल कर रहिये इम्तिहानो का दौर ह
Teri Kami Khalti Rahti Hai Sada,
Ek Be Naam Tasweer Ki Tarah.