कितना पाक हुआ करती थी पहले की मोहब्बत भी…
नजर से नजर मिलते ही दुपट्टे का ख्याल होता था…
ज़िंदगी तेरी ये हमसे नराजगी कैसी है,ख्वाबों को छीनने की तेरी ये जिद कैसी है,तिनका-तिनका जोड़ सपनों को जोड़ा है,यूँ अचानक इन्हें तोड़ने की आदत कैसी है l
अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
जिस को गले लगा लिया वो दूर हो गया
हर रात को तुम इतना
याद आते हो के हम भूल गए हैं,
के ये रातें ख्वाबों के लिए होती हैं,
या तुम्हारी यादों के लिए|
सुनी थी सिर्फ हमने ग़ज़लों में जुदाई की बातें ;
अब खुद पे बीती तो हक़ीक़त का अंदाज़ा हुआ !!