हद ना पूछो मेरीबेबसी की तुम..मै दर्द बयां करता हूंऔर तू हंसकर सुनती है..!
हद ना पूछो मेरी
बेबसी की तुम..
मै दर्द बयां करता हूं
और तू हंसकर सुनती है..!
बातें मेरी उन्हें समझ नहीं आती,हर बात, बातों में समझाई नहीं जाती lआँखें बंद कर क्यों नहीं सुनती दिल की,दिल की बातों में दिमाग़ लगाई नहीं जाती l
इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम न सोए रात थक कर सो गई
रोज़ इक ताज़ा शेऱ कहां तक लिखूं तेरे लिए,
तुझमें तो रोज़ ही एक नयी बात हुआ करती है…
सुना है, खुदा के दरबार से कुछ फ़रिश्ते फरार हो गए,
कुछ तो वापस चले गए, और कुछ हमारे यार हो गए
Labo se tut gaye guftagu ke sab rishte
wo dekhta hei to bas dekhta hi rahta hei..