एक मोहब्बत बेपनाह सीदोनों काफी हैं..सुकून बर्बाद करने को
एक मोहब्बत बेपनाह सी
दोनों काफी हैं..
सुकून बर्बाद करने को
एक मकाम ज़िन्दगी मैं ऐसा भी आता है
क्या भूलना है बस यही याद रह जाता है
ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझहम अपने शहर में होते तो घर चले जाते
"ज़िंदगी तेरे किताब को, शायद कभी ना पढ़ पाऊँगा,एक शब्द पे ठहरता हूँ, तो दिन गुजर जाता है l"
दिल की एक ही ख़्वाहिश हैं..
धड़कनों की एक ही इच्छा हैं..
के तुम मुझे अपनी बाहों में पनाह दे दो,
और में खो जाओ...