यह चमत्कार केवल “विश्वास” ही कर सकता हैं,
जो पत्थर को भी “भगवान” कर सकता हैं.
Aa Bichadne Ka Koi Aur Tareeqa DhoodhenPyyar Badhta Hai Meri Jaaan Khafa Rahne Se
न मेरा एक होगा , न तेरा लाख होगा,
तारिफ तेरी ,न मेरा मजाक होगा,
गुरुर न कर शाह-ए-शरीर का,
मेरा भी खाक होगा , तेरा भी खाक होगा
चलो खेलें वही बाजी
जो पुराना खेल है तेरा,
तू फिर से बेवफाई करना
मैं फिर आँसू बहाऊंगा।
आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा
पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उसने मुझे छू कर नहीं देखा