आज जो इस अकेलेपन का एहसास हुआ खुद को,तो समहाल नहीं पाया अपने इन आसुओं को।
आज जो इस अकेलेपन का एहसास हुआ खुद को,
तो समहाल नहीं पाया अपने इन आसुओं को।
हर रोज़ तुझसे मिलने के बाद भी,
हर रोज़ तुझसे मिलने का इंतज़ार करता हूँ।
"परिवर्तन! तिथि बदलने से नहीमन की स्थिति बदलने से होगा"
“मन में जो है साफ़ साफ़ कह देना चाहिए
क्योकि सच बोलने से फैसले होते है और झूट बोलने से फासले।” – Aaj Ka Suvichar