हर रोज़ तुझसे मिलने के बाद भी,
हर रोज़ तुझसे मिलने का इंतज़ार करता हूँ।
अब ये हसरत है कि सीने से लगाकर तुझको
इस क़दर रोऊँ की आंसू आ जाये
ज़िन्दगी जब भी मुझे लगा मैंने तुझे पढ़ लिया,लेकिन न जाने क्यों कम्बख़्त तूने एक और पन्ना खोल दिया
ज़िन्दगी जब भी मुझे लगा मैंने तुझे पढ़ लिया,
लेकिन न जाने क्यों कम्बख़्त तूने एक और पन्ना खोल दिया
घमंड ही नहीं गुरुर है अपने किसान होने का।
बढ़ रही हैं कीमते अनाज की,
पर हो न सकी विदा बेटी किसान की
मदद करना सीखिये
फायदे के बगैर
मिलना जुलना सीखिये
मतलब के बगैर
जिन्दगी जीना सीखिये
दिखावे के बगैर
और
मुस्कुराना सीखिये
सेल्फी के बगैर!