दर्द मिन्नत-कशे- ✒ दवा न हुआ,
मै न अच्छा हुआ बुरा न हुआ,
जमा करते हो क्यों रकीबो को,
एक तमाशा हुआ गिला न हुआ.
उसने मुझ से नफरत मरते दम तक करने की कसम खा ली है,और मैंने भी उसे प्यार मरते दम तक करने की कसम खा ली है !!
उसने मुझ से नफरत मरते दम तक करने की कसम खा ली है,
और मैंने भी उसे प्यार मरते दम तक करने की कसम खा ली है !!
Tum Mujhe Kabhi Dil Se Kabhi Aankhon Se Pukaaro,
Yeh Hontho Ke Takalluf Toh Zamaane Ke Liye Hain.
Talash uski karo jo pass na ho.
Bhula do usse jispar vihswas na ho.
Ham to apne gam par hans parte hai.
Taaki samne wala udas na ho.