हमदर्दी ना करो मुझसे ए मेरे हमदर्द दोस्तों,वो भी बड़ी हमदर्द थी जो दर्द हजारो दे गई !!
हमदर्दी ना करो मुझसे ए मेरे हमदर्द दोस्तों,
वो भी बड़ी हमदर्द थी जो दर्द हजारो दे गई !!
हमसे ना कट सकेगा अंधेरो का ये सफर
अब शाम हो रही हे मेरा हाथ थाम लो।
उनकी चाहत हमसे बयां ना हो पाई,
थक गए हम शायरी करते-करते...!!
असल में वही
जीवन की चाल समझता है …
जो सफ़र में
धूल को गुलाल समझता है ..!
Tujhse banti bhi nhi,
tere bina chalti bhi nhi..