देख कर उसको तेरा यूँ पलट जाना…
नफरत बता रही है तूने मोहब्बत गज़ब की थी!
काग़ज के फूल भी महकते हैं,
कोई देता है, जब मोहब्बत से!
मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत कामैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का
मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
है पेट की आग कुछ ऐसी ,दो रोटी से कहाँ बुझा पाता हूँ lघुमता हूँ दर-दर कुछ इस तरहअपने घर पर मेहमान हो जाता हूँ l