सारा जहाँ है जिसकी शरण में…
नमन है उस शिव के चरण में…
बने उस शिव के चरणों की धूल…
आओ मिलकर चढ़ायें हम श्रद्धा के फूल…
कविता के कई मतलब हो सकते हैपर कविता कभी मतलबी नहीं हो सकती !!
यूं तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैंमिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं
झूठ के साथ तेरे साथ रहे,तो इश्क़ गुनाह हो जायेगा,इस लिए बेहतर होगा,सच के साथ जुदा हो जायेंगे l
दिल-ए-आबाद का बर्बाद भी होना ज़रूरी है
जिसे पाना ज़रूरी है उसे खोना ज़रूरी है
क्या हुआ?
जरा सी कैद में घुटन होने लगी?तुम तो परिंदे पालने के बहुत शौकीन थे..