तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद…
जब भी जाता हूँ कहने,जुबाँ कुछ कँहा बोल पाता है lबस रहती है नज़र में नज़र,कहना-सुनना तो यूँ ही हो जाता है l
हम नहा भी ले तो फील नहीं आती है,तुम्हारी तो नोटबुक से भी खुशबू आती है ।
मुझसे बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी खुश-खुश रहती है,उस लड़की ने मुझसे बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी।
Pyar Bhari shayari