टिक टिक करते घड़ियों के कांटे,
उम्र ढल रही मेरी बताते रहते है…
चाय सा इश्क़ किया है तुमसेसुबह शाम न मिले तो सिरदर्द सा करता है
चाय सा इश्क़ किया है तुमसे
सुबह शाम न मिले तो सिरदर्द सा करता है
मोहब्बत नाम है जिसका वो ऐसी क़ैद है यारों,कि उम्रें बीत जाती हैं सजा पूरी नहीं होती।
जितना दिखाता हूँ,
उससे जादा याद करता हूँ,
जितना बताता हूँ,
उससे जादा प्यार करता हूँ l
अभी अभी इक आईना तोड़ आया हूँ,
की तेरी तस्वीर,
मेरी आँखों में नज़र आती है l