हमने अपनी यादों के बागीचे में
तेरी यादों के पौधे को सींच कर रख रखा था
पर आप हमे अपनी यादों के बगीचे में
लगी गंदी घास समझ कर भूल गये।
आदत होती तो छूट भी जातीअब ज़िन्दगी हो जीना तो नहीं छोड़ सकता।
अब ज़िन्दगी हो जीना तो नहीं छोड़ सकता।
आग तो हम भी लगा दें दिलों में अपनी शायरी से…
पर डरते हैं कि कहीं तुमसे इश्क न हो जाए हमें…
कुछ और, और कहो, में वक्त गुजर जाता है,घंटो का साथ भी,मिनट भर का नज़र आता है l
मोहब्बत से देख लो अगर,
तो यूँ ही मर जायेंगे,
हर सितम ढाना,
जरूरी तो नहीं…