बहुत मुश्किल से करता हूँ तेरी यादों का कारोबारमुनाफा कम है पर गुज़ारा हो ही जाता है
आग तो हम भी लगा दें दिलों में अपनी शायरी से…
पर डरते हैं कि कहीं तुमसे इश्क न हो जाए हमें…
जब भी जाता हूँ कहने,जुबाँ कुछ कँहा बोल पाता है lबस रहती है नज़र में नज़र,कहना-सुनना तो यूँ ही हो जाता है l
कुछ और, और कहो, में वक्त गुजर जाता है,घंटो का साथ भी,मिनट भर का नज़र आता है l
"जो मोह्हबत मुझे ना मिली,
वैसी मोह्हबत निभाऊंगा,
मुझे मिले हर झूठ के बदले,
तुम्हें सच बताता जाऊँगा l"❤
मोहब्बत से देख लो अगर,
तो यूँ ही मर जायेंगे,
हर सितम ढाना,
जरूरी तो नहीं…