जो दिखा तुम्हारी आँखों में अश्क ,ये दर्द थोड़ा जादा बढ़ गया lहो गया फिर से तुमसे इश्क ,ये दिल फिर से नया हो गया l
रोज सुबह पेड़ों कोखड़े हो लगातार देखता हूँ,ये हमें सिखाते है,हर मौसम में जिंदा रह जाना l
साँसो के रोकने से धड़कने रूकती नहीं,एक साथ चाहिए तेरा,ये सफ़र अकेले कटता नहीं lकैसे कहूँ कितनी मोह्हबत है,लफ्ज़ कम पड़ जाते है l
"आँखें खोलते ही ज़िंदगी,
दहशत में नज़र आ रही है,
ना जाने कितनी गलतियों का,
हिसाब एक साथ चुका रही है l"
लेके चले थे तूफान ठोकरों का डर ना था
संग था कारवां बिछड़ने का गम ना था
अर्ज़ी थी साथ रहने की उम्र भर लेकिन मिलने का वक़्त ना था
कोशिश तो बोहत की मगर नज़रें मिलाने का दम ना था