लेके चले थे तूफान ठोकरों का डर ना था
संग था कारवां बिछड़ने का गम ना था
अर्ज़ी थी साथ रहने की उम्र भर लेकिन मिलने का वक़्त ना था
कोशिश तो बोहत की मगर नज़रें मिलाने का दम ना था
अपने साये से भी अश्कों को छुपा कर रोना
जब भी रोना तो चिरागों को बुझा कर रोना
जहाँ चोट खाना वहां मुस्कुराना
मगर इस अदा से के रोये सारा ज़माना
हर बात में आंसू बहाया नहीं करते,दिल की बात हर किसी को बताया नहीं करते,लोग मुट्ठी में नमक लेके घूमते है..दिल के जख्म हर किसी को दिखाया नहीं करते।
Beshak tumne mujhe thukra diya hai,
Mat sochna ke humne tumhe bhula diya hai,
Teri chahat pe aaj bhi bharosa hai,
Ye to meri kismat ne mujhe daga diya hai..!!
पहली मुलाकात में ये ऐसा हुआ अहसास,
उनके मुहब्बत के दो शब्द थे बहुत खास.
आखिरी मुलाकात में कुछ कहना ही था उनसे,
हम सोचते ही रह गए की गुजर गया साल.
HAPPY NEW YEAR 2021