यूं ज़ुल्फें खोल कर न रखा कर मेरी जान,
उलझ सा जाता हूँ इनमें जब भी देखता हूँ !!
बहुत चालाकी से तेरे गालों को चूम लेती हैं;
इन ज़ुल्फ़ों को भी तूने सिर पर चढ़ा रखा हैं !!
"कल रात की अंतिम बात,सुबह तुमसे मुलाक़ातअच्छा लगता है,हर बार तुमसे मिलना,पहली बार लगता है l'
आज हम भी एक नेक काम कर आए,
दिल की वसीयत किसी के नाम कर आए,
प्यार हैं उनसे ये जानते हैं वो……,
मज़बूरी थी जो झुकी नज़रों से इनकार कर आए
हर रात को तुम इतना
याद आते हो के हम भूल गए हैं,
के ये रातें ख्वाबों के लिए होती हैं,
या तुम्हारी यादों के लिए|
तुम्हारी दुनिया से चले जाने के बाद
हम तुम्हें हर एक तारे में नजर आया करेंगे
तुम हर पल कोई दुआ माँग लेना
और हम हर बार टूट जाया करेंगे