चढ़ गये जो हंसकर सूली,
खाई जिन्होंने सीने पर गोली,
हम उनको प्रणाम करते हैं,
जो मिट गए देश के लिए,
हम उनको सलाम करते हैं.
वेदान्त कोई पाप नहीं जानता, वो केवल त्रुटी जानता हैं और वेदान्त कहता है कि सबसे बड़ी त्रुटी यह कहना है कि तुम कमजोर हो, तुम पापी हो, एक तुच्छ प्राणी हो, और तुम्हारे पास कोई शक्ति नहीं है और तुम ये-वो नहीं कर सकते.
इंसान हर घर में जन्म लेता है
लेकिन इंसानियत कहीं कहीं ही जन्म लेती है