चरण मंदिर तक पहुंचाते हैं
और आचरण भगवान् तक
मैं तो वैरागी हूं,ना सम्मान ना मोह,ना अपमान ना भय,ना शत्रु, ना कोई मित्र,ना कोई अपना ना परायाना ईश संसार से कोई लेना ना देनापर कभी धर्म के नाम पे किये जाने वालाआडम्बर पक्षपात का आधार बनेगा तोमें उसका विनाश अवश्य ही करूँगा..
पिता जमीर है,
पिता जागीर है|
जिसके पास ये है वह सबसे आमिर है|
हैप्पी फादर्स डे पापा
संस्कारों से बड़ी कोई वसीयत नहीं होती
और ईमानदारी से बड़ी कोई विरासत नहीं होती
“लोग क्या कहेंगे”- ये बात इंसान को आगे नहीं बढ़ने देती